हुसैनाबाद में ‘घटिया विकास’ का खुला खेलOpen game of 'poor development' in Hussainabad
प्रमुख नाली निर्माण पर सवाल, नगर अध्यक्ष की चुप्पी कठघरे में
हुसैनाबाद नगर पंचायत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वार्ड संख्या 9 अंतर्गत डॉ. नादीर साहब के समीप, मशहूर अधिवक्ता ललिता बाबू के आवास के पास वार्ड 6 एवं 9 के संयुक्त क्षेत्र में कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य में भारी अनियमितता सामने आई है। निर्माण की गुणवत्ता इतनी कमजोर बताई जा रही है कि इसे देखकर स्थानीय नागरिकों में आक्रोश फैल गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाली निर्माण में घटिया किस्म का बालू, पत्थर का डस्ट और मानकविहीन कंक्रीट का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, नाली पर डाली जा रही पटिया की ढलाई में रोड सपोर्ट की दूरी भी इंजीनियरिंग मानकों के बिल्कुल विपरीत रखी गई है, जिससे पटिया की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह नाली केवल एक मोहल्ले की नहीं, बल्कि राज टोली, लंबी गली, सैयद टोली सहित तीन-चार मोहल्लों की जल निकासी की मुख्य जीवन रेखा है। यही मार्ग रामनवमी, दुर्गा पूजा सहित अन्य बड़े त्योहारों के दौरान जुलूस रूट में शामिल रहता है, जहां से भारी वाहनों और विशाल मूर्तियों की आवाजाही होती है। ऐसे में कमजोर पटिया का निर्माण भविष्य में बड़े हादसे को न्योता देने जैसा माना जा रहा है।
यह विकास नहीं, जनता के पैसे की बर्बादी है” हसनैन जैदी
कांग्रेस झारखंड के अल्पसंख्यक महासचिव हसनैन जैदी ने इस मामले पर तीखा रुख अपनाते हुए कहा
नगर पंचायत में विकास के नाम पर घटिया निर्माण की परंपरा बनती जा रही है। अगर गुणवत्ता से समझौता होगा तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। यह सीधे-सीधे जनता के पैसे की बर्बादी और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत को दर्शाता है।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्माण कार्य का तकनीकी निरीक्षण कर मानक के अनुरूप कार्य पूरा नहीं कराया गया तो जनता को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
नगर अध्यक्ष की चुप्पी पर सवाल
गौर करने वाली बात यह है कि इस नाली की समस्या को लेकर हुई बैठक में नगर अध्यक्ष शशि कुमार स्वयं उपस्थित थे। यह बैठक मशहूर अधिवक्ता ललिता बाबू के आवास पर हुई थी। बावजूद इसके, निर्माण में हो रही खुली लापरवाही पर नगर अध्यक्ष की चुप्पी अब उनकी मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।
स्वर्गीय नादिर रिज़वी ने अपने जीवनकाल में कई बार हुसैनाबाद शहर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की थी। आज जब वह सपना साकार हो रहा है, तो उसी निर्माण को घटिया सामग्री और लापरवाही से बदनाम किया जा रहा है।
बुद्धिजीवियों की दो टूक
शहर के बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि
अगर गुणवत्ता से समझौता कर विकास किया जाएगा, तो ऐसे विकास का कोई अर्थ नहीं रह जाता। यह आने वाली पीढ़ियों के साथ धोखा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या नगर पंचायत और नगर अध्यक्ष समय रहते जागेंगे?

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