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मोबलिंचिंग झारखंड के गोड्डा में भीड़ का कहर युवक की पीट-पीटकर हत्या, कानून पर उठे गंभीर सवाल jharkhand men moblinching

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पप्पू अंसारी की फैमिली

गोड्डा (झारखंड)

झारखंड के गोड्डा जिले से एक बार फिर मॉब लिंचिंग की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मवेशी चोरी के शक में ग्रामीणों की भीड़ ने एक युवक को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि झारखंड में लगातार बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं की भयावह तस्वीर भी पेश करती है।

खेत में मिला शव, इलाके में फैली सनसनी

शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 की सुबह गोड्डा जिले के बहियार इलाके के पास एक खेत से 40 वर्षीय पप्पू अंसारी का शव बरामद किया गया। शव की हालत इतनी भयावह थी कि मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पप्पू अंसारी को मवेशी चोरी करते हुए पकड़े जाने का दावा किया गया, जिसके बाद ग्रामीणों की भीड़ ने उसे डंडों और धारदार हथियारों से बेरहमी से पीटा।

 प्रत्यक्षदर्शियों का दावा: डंडों से इतना मारा कि मौके पर ही मौत हो गई

स्थानीय लोगों के अनुसार, पप्पू अंसारी अपने तीन साथियों के साथ मवेशी चोरी के इरादे से आया था। इसी दौरान ग्रामीणों ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। उसके तीन साथी मौके से फरार हो गए, लेकिन पप्पू भीड़ के हत्थे चढ़ गया।

बताया जा रहा है कि:

* उसे गाड़ी से खींचकर बाहर निकाला गया

* घंटों तक मारपीट की गई

* पूरे शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे

* आंखें निकालने और शरीर को कुचलने जैसे अमानवीय कृत्य किए गए

परिवार का दर्द: अगर पुलिस को सौंप देते तो आज जिंदा होता

पप्पू अंसारी की पत्नी और परिजनों का बयान इस घटना की भयावहता को और गहरा कर देता है। परिवार का कहना है कि—

अगर उसे प्रशासन के हवाले कर दिया जाता, तो उसकी जान बच सकती थी। कानून किसलिए है? क्या भीड़ को किसी की जान लेने का अधिकार है?

परिजनों के अनुसार:

* पप्पू चार बेटियों और एक बेटे का पिता था

* परिवार में वही एकमात्र कमाने वाला था

* बच्चों की पढ़ाई और भविष्य अब अंधकार में है

* शव की हालत पहचान से परे थी

पत्नी का कहना है कि

हमारे घर में अब कोई सहारा नहीं बचा। प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि हमें इंसाफ मिले।

पुलिस का पक्ष: “अपराधिक प्रवृत्ति का था, जांच जारी”

पुलिस ने फिलहाल मॉब लिंचिंग की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह स्वीकार किया है कि पप्पू अंसारी के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज थे। हालांकि पुलिस यह भी स्पष्ट कर रही है कि—

* किसी को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं है

* हमलावरों की पहचान की जा रही है

* कई जगहों पर छापेमारी जारी है

* दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा

झारखंड में मॉब लिंचिंग: एक भयावह ट्रेंड

परिजनों और सामाजिक संगठनों का दावा है कि:

* पिछले 5 वर्षों में झारखंड में 46 से अधिक मॉब लिंचिंग की घटनाएं हो चुकी हैं
* अधिकतर मामलों में पीड़ित अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े रहे हैं
* प्रशासनिक कार्रवाई अक्सर धीमी और कमजोर रही है

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि—
क्या कानून का राज कमजोर पड़ता जा रहा है?
क्या भीड़ अब न्यायाधीश बन चुकी है?


इंसाफ की मांग और सरकार से सवाल

पीड़ित परिवार ने झारखंड सरकार और प्रशासन से मांग की है कि—

* दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो

* परिवार को मुआवजा और सुरक्षा दी जाए

* बच्चों की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी सरकार ले

परिजनों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाएंगे।

स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर इरफान अंसारी ने गोड्डा एसपी से बात कर उन्हें गंभीरता से जांच के लिए कहा है साथ ही सोशल मीडिया पर ये भी बात रखते हुए कहा  के ये घटना काफी निंदनीय है और ये कौन लोग हैं जो पूरे देश में एक भाई के खिलाफ दिल में नफरत डाल कर ऐसा करवा रहे ये आने वाले दिनों में युवाओं के लिए अच्छा नहीं देश के लिए अच्छा नहीं है।

निष्कर्ष:

गोड्डा की यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, कानून और इंसानियत की सामूहिक विफलता का प्रतीक बनती जा रही है। अपराध चाहे जो भी हो, सजा देने का अधिकार सिर्फ कानून को है, भीड़ को नहीं।

अब देखने वाली बात यह होगी कि झारखंड सरकार और प्रशासन इस मामले में कितनी संवेदनशीलता और सख्ती दिखाते हैं  या यह मामला भी आंकड़ों में सिमटकर रह जाएगा।

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